Mahamrityunjay Mantra PDF in Hindi | जागृत महामृत्युंजय मंत्र PDF

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जागृत महामृत्युंजय मंत्र मृतप्राय व्यक्ति में भी प्राण का संचार करने वाला है इसके लिए इसे मृत संजीवनी मंत्र भी कहा जाता है। इस पोस्ट में आप महामृत्युंजय मंत्र के रचना की कथा, मंत्र का हिंदी अर्थ व् मंत्र साधना से होने वाले लाभ के बारे में पढ़ सकते है।

Mahamrityunjay Mantra Lyrics PDF in Hindiमहामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स

Mahamrityunjay Mantra in Hindi Lyrics

जागृत महामृत्युंजय मंत्र

।। मृत संजीवनी मंत्र ।।

।। ॐ ह्रौं जूं स: । ॐ भूर्भुव: स्व: ।।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।
ॐ स्व: भुव: भू: ॐ । स: जूं ह्रौं ॐ ।।

Mahamrityunjay Mantra Meaning in Hindiमहामृत्युंजय मंत्र का अर्थ

हम उन भगवान शिव से प्रार्थना करते है, जिनके तीन नेत्र हैं वो भूत, भविष्य व् वर्त्तमान सब जानने वाले है। वह शिव एक चैतन्य शक्ति है और सभी दिशाओ में विधमान है। उस चैतन्य शक्ति को हम प्रणाम करते है| हम उन शिवजी से जुड़ने की याचना करते है उनसे जुड़ने से हमारे हर श्वास में जीवन शक्ति का संचार होता है। हमारे शरीर का रोग दूर हो बल बढ़ जाता है और हमारा शरीर पुष्ट होता है। उनसे जुड़ने से हमारे नकारात्मक विचार नष्ट होकर सुगंधित विचार उत्तपन्न होते है।

हम आपसे प्रार्थना करते है कि अपनी कृपा से हमे बंधनो से ऐसे मुक्त कर दीजिये जैसे खीरा पकने पर बिना किसी कष्ट को सहे अपने बेल से अलग हो जाता है। उसी प्रकार हम अपने दायित्व को निभाकर अनायास ही इस शरीर व् मोह के बंधन से बिना कष्ट मुक्त हो जाएं। हमे मृत्यु के भय से मुक्ति दीजिए ! प्रभु !!!

Mahamrityunjay Mantra PDF in Hindi

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भगवान् शिव के अन्य पाठ

महामृत्युंजय मंत्र साधना के लाभ

महामृत्युंजय मंत्र भगवान् शिव की कृपा पाने के लिए सबसे प्रभावशाली मंत्र माना जाता है। इस मंत्र की रचना महान मार्कण्डेय ऋषि द्वारा की गयी थी। इस मंत्र का वर्णन ऋग्वेद में मिलता है। माना जाता है की इस मंत्र की शक्ति साधक को अकाल मृत्यु व् जीवन से कठिनाईयों को दूर कर देता है। चूँकि इस मंत्र का प्रभाव संजीवनी के समान है अर्थात मृतप्राय व्यक्ति में भी प्राण का संचार करने वाला है इसके लिए इसे मृत संजीवनी मंत्र भी कहा जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र रचना की कथा

मृकंडू नामक के एक महान ऋषि थे| निसंतान होने के कारण वह और उनकी पत्नी मरुदमति दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति की कामना से उन्होंने घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् शिवजी प्रकट हुए और उन्होंने ऋषि से वरदान मांगने के लिए कहा। ऋषि ने उन्हें संतान की इच्छा बताई।

शिवजी ने कहा की जो संतान आप चाहते है उसका चयन दो विकल्प में से करना होगा। पहला विकल्प है कि आपका पुत्र मुर्ख और दीर्घायु होगा, दूसरा विकल्प यह की आपका पुत्र अत्यंत ही ज्ञानी होगा किन्तु 16 वर्ष की आयु में मृत्यु को प्राप्त हो जाएगा।

ऋषि ने दूसरा विकल्प का चयन किया और जन्म के बाद अपनी संतान मार्कण्डेय को बताया की उनकी मृत्यु 16 वर्ष की आयु पूरा होते ही हो जायेगी। मार्कण्डेय ऋषि ने अकाल मृत्यु को टालने के लिए भगवान् शिव की शरण में गए और उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र की रचना कर मंत्र साधना की। निश्चित दिन यमराज आये और भगवान् शिव की आज्ञा से उन्हें मार्कण्डेय ऋषि को छोड़ कर जाना पड़ा। भगवान् शिव ने मार्कण्डेय ऋषि को अमर होने का वरदान दिया।

Lyrics of Mahamrityunjay Mantra in English

।। Mrit Sanjivani Mantra ।।

।। Om Hrom Jum Sah । Om Bhurbhuvah-svah ।।
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pustivardhanam ।
Urvarukamiva bandhananmrituyomukshiya Mamritat ।
Om Svah Bhuvar Bhu Om Sah Jum Hrom Om ।।

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